Wednesday, June 9, 2010

सुनो तो !

कोई आपसा न मिला है न मिलेगा हमसे
जाने किस बात का शिकवा गिला है हमसे

मेरा सपना,मेरी खुशियाँ न मिलेगी फिरसे
अब तक जो पल ,हंसी का मिला है तुमसे

हम हैं तेरे पास मगर दूर तुम्ही जाने लगे
प्यार का पहला कदम देखो चला है फिरसे

कोई तुझे पाए मंजूर नहीं ये हमको
मतलबी दिल है मेरा ,फिर भी भला है उससे

'शक' है दुश्मन मेरी चाहत का पता है लेकिन
गम है की शख्श भरोसे  का न मिला है हमसे

मरता तो नहीं मैं याद में पड़ के तेरी
जीने की कसम एक दिन ये जो मोला है तुमसे

उम्र इंतज़ार में काटूं,चलो ये मान भी लूँ
न भूलना ,ख्वाबों में मिलने का सिला है हमसे

No comments: