Wednesday, April 3, 2013

एक सुबह


सूरज भी जग सा रहा है 
रौशनी बिखरी जा रही है 
धुंधला धुंधला सा नशा जाने को है 
खामोशी सिमटी जा रही है 
अंगड़ाईयां सांसो में है 
एक उमंग सी उठती है पर 
फिर ख़याल एक आता है 
फिर से चादर आँखों पे रख 
झूठा ही सही, अन्धेरा कर लेता हूँ 
आँखे बंद करता हूँ 
एक तसल्ली  खुद को देता हूँ 
कि अभी भी रात है बाकी 
ख़्वाबों की सौगात है बाकी 
ख़्वाबों में उसको देखूंगा 
नींद ना आये तो भी क्या 
अँधेरे में उसको सोचूंगा 
वो कौन है 
वो कोई और नहीं तुम ही तो हो 
जिसके लिए कितने ही बहाने रोज़ कर जाता हूँ 
सब से 
रब से 
खुद से भी 
शायद तुम से भी।

Wednesday, June 9, 2010

और जरा


और जरा तुम पास मेरे होते तो
तेरे साए में सर रख कर सोते तो

इस दुनिया में गम का कोई साथी नहीं
मेरे लिए गम के सिवा कोई बाकी नहीं
खुशियाँ भी तो दर्द लिए हैं तुम जैसी
पास तेरे न चैन मिले ,पर खोते तो..... .

दिल की धड़कन बढती जाए जाने क्यों
अहसास  मेरे  गैर भला पहचाने क्यों
कह दो तुम भी साथ मेरा जो ना चाहो
तेरे ख्वाब लिए हम ना ऐसे सोते तो ....

कि मुझे कुछ पूछना भी था!

कभी कभी सोंचता हूँ
सिर्फ मैं और तुम
पास-दूर कोई नहीं
तन्हाइयों के बीच
खेतों में कहीं
बैठे रहें,खो जायें
घंटो बीत जायें
ढेर सारी  बातों में.

पर
 पास जब तुम होते हो
पता नहीं क्यों?
याद ही नहीं आता  कि
बात क्या करें?
तुम्हारे जाने के बाद
होता है अहसास
कि मुझे कुछ पूछना भी था!

सुनो तो !

कोई आपसा न मिला है न मिलेगा हमसे
जाने किस बात का शिकवा गिला है हमसे

मेरा सपना,मेरी खुशियाँ न मिलेगी फिरसे
अब तक जो पल ,हंसी का मिला है तुमसे

हम हैं तेरे पास मगर दूर तुम्ही जाने लगे
प्यार का पहला कदम देखो चला है फिरसे

कोई तुझे पाए मंजूर नहीं ये हमको
मतलबी दिल है मेरा ,फिर भी भला है उससे

'शक' है दुश्मन मेरी चाहत का पता है लेकिन
गम है की शख्श भरोसे  का न मिला है हमसे

मरता तो नहीं मैं याद में पड़ के तेरी
जीने की कसम एक दिन ये जो मोला है तुमसे

उम्र इंतज़ार में काटूं,चलो ये मान भी लूँ
न भूलना ,ख्वाबों में मिलने का सिला है हमसे

मेरी नज़्म गाती हवाएं

ज़िन्दगी का ये सफ़र कुछ ऐसे गुजार दूँ
तेरी आँखों में तैरने को कोई नगमा उतार दूँ

तू मेरी वफ़ा का लुत्फ़ ले, मैं तुझको सदाएं दूँ
तेरी खुशियों के कायनात में हर पल निसार दूँ.

मेरी नज़्म गाती हवाएं पत्तों के बीच जाकर
तू खोयी सी रहे और, मैं तुझको निहार लूँ.

आवेदन --अनाथालय के एक बच्चे की अंतर्वेदना

 थोड़ी ममता , थोडा  स्नेह
क्या थोडा मोह उधार मिलेगा 
हम सबके नफ़रत सह लेंगे
गर तुमसे थोडा प्यार मिलेगा

सब आते हैं,फिर चले जाते हैं
शायद खुद को बहलाने आते हैं
मेरी उम्र नहीं की समझ सकूँ
इतने लोग यहाँ पे क्यों आते हैं
जान भी लूँ,पहचानूँ दुनिया गर
तुझमे अपनों सा अधिकार मिलेगा .

मेरे खून के रिश्ते कहाँ गए सब
इस भीड़ में क्या कोई मेरा होगा
या बस खिलौने टॉफी बाँटने के बाद
फिर वही तनहा दिन मेरा होगा

रिश्ते नातों की छोडो पेचीदे ये
मेरे दिन तो बस सीधे सीधे से
जिससे झगडू , जिसपे रोऊँ भी
क्या खेलने को कोई यार मिलेगा .

दुनिया में हम तो नहीं अनोखे
दया की भीख  के हम न भूखे
मेरी दुखती रग पर हाँथ न रखना
कुछ देना है तो बस ये दे देना
जिसके लिए कुछ करना चहुँ
क्या एक रिश्तीं का संसार मिलेगा. 

Saturday, May 1, 2010

यादें



तुझको दिल में मैं बसाना चाहता हूँ
तेरी यादें गुनगुनाना चाहता हूँ
हर घरी के दर्द से एक मौत बेहतर
उस मौत से तुझमे समाना चाहता हूँ
फासले बनते बिगड़ते रहते हैं
तुम रूह मेरी हम यही बस कहते हैं
इस बात में भी दर्द कोई ढूंढ लेना
उस रूह को अपना बनाना चाहता हूँ
संग तेरा और बस तन्हाई हो
तू ना तो तेरे यादों की परछाई हो
उस छांव में कुछ मुझे आराम मिलता
इसी छाँव में एक आशियाना चाहता हूँ