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Sunday, October 1, 2017

निर्वाण



बंजारा मुसाफिर हो जाऊं 
फिर राहों में ही खो जाऊँ। 
मंज़िल की कोई फिक्र ना हो 

खुद से खुद का जिक्र न हो। 
रिश्तों का मायाजाल हटा दूँ 
मुझे बांधे वो जंजाल हटा दूँ ।
आवारापन रूह पे छाये 
वक्त मुझे घसीट ना पाये।

काश यही अंजाम हो मेरा 
हाँ ऐसा 'निर्वाण' हो मेरा!


#निर्वाण : मुक्ति /मोक्ष 

Tuesday, October 29, 2013

बेचने वाले बड़े अजीब होते हैं.

this is called perfect business
बेचने वाले बड़े अजीब होते हैं.
अपने गम को तो बक्शा नहीं .
कभी किसी भूखे बच्चे की तस्वीर बेच दी,
कभी किसी अपाहिज की तकदीर बेच दी.
मांगा जब हिसाब उससे
तो इंसानियत की जंजीर भेज दी.
कभी भूकंप की तबाही को बेचा ,
तो कभी सहादत की स्याही की बेचा 
कभी बाढ़ का खौफ, फांसी का उत्सव बेचा
और कभी अकाल का भूख और गिद्धों के करलव को बेचा
कभी युद्ध की दीवाली तो कभी बलात्कार का सच बिक गया
तो कभी अराजकता  और कभी अपनी ही हाहाकार को बेचा
सच में....सचमुच...बेचने वाले ने खूब फायदा-नफा कमाया है. आज दावत है.
#indianmedia
#pseudohumanright
#artofphotography